दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के लाखों लोगों की उम्मीद को कैसे मिलेगी उड़ान, पढ़िए- पूरी स्टोरी

jewar airport news update

नोएडा [अरविंद मिश्रा]। राजनीति की बिसात पर मुद्दे शह और मात का सबसे बड़ा मोहरा हैं। विकास और क्षेत्र की बड़ी जरूरत राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दूसरा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को भी दलों ने सियासी बना दिया। बसपा, सपा, कांग्रेस की चाल से जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक दशक से भी अधिक समय तक मात खाता रहा। केंद्र व प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद भी एयरपोर्ट के रास्ते की अड़चन दूर नहीं हुई है। मुआवजे और कोर्ट कचहरी में फंसे एयरपोर्ट को लेकर लोगों की उम्मीदें अब फिर से परवान चढ़ रही हैं।

दिल्ली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट के विकल्प के तौर पर 2007 में प्रदेश की तत्कालीन बसपा सरकार ने जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट का प्रस्ताव केंद्र को भेजा था। लेकिन दिल्ली एयरपोर्ट से 150 किमी के दायरे में होने की वजह से इस प्रस्ताव को फाइलों में बंद कर दिया। प्रदेश में बसपा सत्ता से बेदखल हुई तो समाजवादी पार्टी आ गई। सपा सरकार ने एयरपोर्ट को लेकर फंसे दूरी के तकनीकी पेंच का फायदा उठाया। सपा ने जेवर एयरपोर्ट का प्रस्ताव रद करते हुए इसे आगरा या फिरोजाबाद के हिरनपुर गांव में बनाने का प्रस्ताव तैयार किया। लेकिन सपा सरकार का यह मंसूबा पूरा नहीं हुआ। आगरा में एयरपोर्ट के लिए रक्षा विभाग की एनओसी न मिलने से मामला अटक गया। वर्ष 2014 में केंद्र की कांग्रेसनीत यूपीए सरकार की जगह भाजपा की अगुवाई में एनडीए की सरकार बन गई। उस वक्त तक जेवर एयरपोर्ट को प्रस्ताव को केंद्र के पास धूल फांकते हुए करीब सात साल का समय बीत गया। केंद्र सरकार ने एयरपोर्ट की फाइल को दोबारा आगे बढ़ाते हुए सपा सरकार को जेवर में ही इसके लिए सहमति बनाने का प्रयास किया। इसी बीच सपा भी प्रदेश की सत्ता से बेदखल हो गई और केंद्र के साथ प्रदेश की कमान भी भाजपा के हाथ में आ गई।

काम ने रफ्तार पकड़ी तो वर्षों से राजनीति की बिसात पर मात खा रहे जेवर एयरपोर्ट के धरातल पर उतरने की संभावनाएं बन गई। केंद्र ने सैद्धांतिक मंजूरी देकर जेवर में ग्रीन फील्ड इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर मुहर लगा दी। एक साल की अवधि में एयरपोर्ट केंद्र ने एयरपोर्ट के लिए लगभग सभी तरह की अनापत्ति भी जारी कर दीं। प्रदेश सरकार ने एयरपोर्ट के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट कंपनी का गठन करने के साथ जमीन अधिग्रहण के लिए चार हजार करोड़ रुपये मुआवजा वितरण को भी उपलब्ध करा दिया। लेकिन मुआवजे से असंतुष्ट कुछ किसानों ने इलाहाबाद हाइकोर्ट में याचिका दायर कर दी। इसके चलते लोकसभा चुनाव से पहले एयरपोर्ट का शिलान्यास अटक गया।

एसपी शर्मा (आइआइए ग्रेटर नोएडा अध्यक्ष) की मानें तो जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से गौतमबुद्ध नगर सीधे दुनिया भर के देशों से जुड़ जाएगा। कारोबारियों को इससे फायदा होगा।

पीके गुप्ता (चांसलर, शारदा विश्वविद्यालय) का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में हवाई सफर करने वालों की संख्या बढ़ी है ।दिल्ली इंटरनेशनल एयरपोर्ट का दबाव कम करने के साथ जेवर एयरपोर्ट से यात्रियों को बेहतर सुविधा मिल पाएंगी। इंतजार है कि एयरपोर्ट से उड़ानें शुरू हों।

राकेश कुमार (निदेशक ईपीसीएच) के मुताबिक, भारत विश्व की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। बहुराष्ट्रीय कंपनियां एनसीआर में निवेश कर रही हैं। एयर कनेक्टिविटी बेहतर होने से फायदा मिलेगा। 

जेपी नागर (सेवानिवृत्त जज) का कहना है कि एनसीआर में काफी संख्या में लोग हवाई सफर करते हैं। दिल्ली में जाम जैसी समस्याओं से एयरपोर्ट तक पहुंचने में परेशानी होती है। जेवर में इंटरनेशनल एयरपोर्ट बनने से सहूलियत होगी।

Source from:
https://www.jagran.com/elections/lok-sabha-ncr-lok-sabha-election-2019-jewar-airport-will-connect-with-delhi-and-ncr-19092420.html