कोरोना महामारी में सड़क के जुड़े बच्चो की सुरक्षा के लिए विश्व बालश्रम निषेध दिवस पर किया गया राज्य स्तरीय वेबिनार बैठक

Covid 19

हर साल 12 जून को विश्व बालश्रम निषेध दिवस पूरे विश्व मे मनाया जाता है, जिसका मुख्य उद्देश्य बाल श्रम पर रोक लगाना है। इस महत्वपूर्ण दिवस उपलक्ष्य पर उदय परियोजना के अंतर्गत सामाजिक संस्था चेतना और एचसीएल फाउंडेशन के संयुक्त तत्वाधान में COVID-19 की स्थिति में बाल श्रम बढ़ने की संभावनाओं को देखते हुए राज्य स्तरीय परामर्श (वेबिनार) का आयोजन किया गया। जिसमें मुख्य रूप से श्री विशेष गुप्ता (अध्यक्ष) बाल अधिकार संरक्षण आयोग उ0प्र0, श्री पुनीत मिश्रा (डिप्टी डायरेक्टर) महिला एवं बाल विकास उ0प्र0, श्री सैय्यद रिज़वान अली (राज्य नोडल अधिकारी) श्रमायुक्त कार्यालय, कानपुर उ0प्र0, श्रीमती निधि पुंढीर (डायरेक्टर) एचसीएल फाउंडेशन, नोएडा, उ0प्र0, डॉ0 हेलेन आर शेखर, वी वी गिरी नेशनल लेबर इंस्टिट्यूट, नोएडा, उ0प्र0, श्री अभिषेक पाठक, चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन उ0प्र0, श्री संजय गुप्ता (डायरेक्टर) चेतना संस्था के साथ बाल कल्याण विभाग और अन्य सरकारी एवमं गैर सरकारी संस्थाओं से लगभग 190 से ज्यादा प्रतिभागियों के साथ ज़ूम वेबिनार मीटिंग के द्वारा भाग लिया।

जिसमें कोरोना से फैलने वाली महामारी, लॉकडाउन के कारण फैली भुखमरी और बेरोज़गारी, प्रवासी मज़दूरों के बच्चो के स्पॉन्सरशिप स्कीम के तहत गरीब परिवारों एवं सड़क पर रहने वाले बच्चो के बालश्रम होने की संभावनाओं के साथ बच्चो के शोषण व ट्रैफिकिंग जैसे अनेको मुद्दों पर बच्चो के अधिकारों से लेकर बच्चो की सुरक्षा एवमं संरक्षण के विषयों पर गंभीरता के साथ चर्चा हुई। श्रीमती निधि पुंढीर, डायरेक्टर एचसीएल फाउंडेशन ने बताया कि नोएडा के उदय परियोजना के चल रहे कार्यो के बारे में बताया इसके साथ उन्होंने “जीरो टॉलरेन्स ऑन चाइल्ड लेबर” की भी बात कही। बाल संरक्षण आयोग से श्री विशेष गुप्ता जी ने सभी प्रतिभागियों के अभिवादन करते हुए प्रवासी मज़दूरों के बच्चो एव सड़क पर रह रहे बच्चो के बारे में चिंता वक्त करते हुए बताया कि कोरोना की महामारी के वजह से करीब 32 लाख से ज्यादा प्रवासी परिवार उत्तरप्रदेश में वापस आये है, जिनके बच्चो के हित के लिए हमे उन्हें सरकार के स्पॉन्सरशिप स्कीम के साथ अन्य स्कीम के साथ जोड़ने की पूरी व्यवस्था में लगे हुए है, जिसके लिए मैपिंग का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बाल श्रम का तर्क देते हुए ये भी बताया कि बच्चा बाल मजदूर नही होता है पर बच्चो के परिजन उसे उत्पादक की तरह देखते है, जिसके कारण बच्चो कार्यो में लिप्त करके पैसे कमाने का एक साधन मान लेते है।

इस सभी बातों के आधार पर श्री रिज़वान अली जी ने भी अपनी हामी रखते हुये सरकार के प्रवासी मज़दूरों के बच्चो के लिए “बाल श्रमिक विद्या योजना” के बारे में बताया और जल्दी ही इसका लाभ बच्चो तक पहुँचाने की बात कही। इन सब बातों के साथ श्री पुनीत मिश्रा जी ने बताया कि सरकार सभी बाल कल्याण एवम संरक्षण अधिकारियों की इस समस्या ने निपटने के लिए ट्रेनिंग करवा रही है। इसके साथ ही हर गांव के आधार पर सूची तैयार की जा रही ताकि परिजनों को मनरेगा के तहत जोड़कर रोजगार और लगभग 3000 बच्चो को स्पॉन्सरशिप स्कीम से जोड़ा जाएगा। चाइल्डलाइन इंडिया फाउंडेशन से अभिषेक ने कोरोना की स्थिति को देखते हुए बाल श्रम बढ़ने की बात रखते हुए कहा कि कोरोना महामारी में लॉकडाउन की स्थिति के वजह से प्रवासी परिवारों पर आर्थिक तंगी की समस्या होने ही है, जिसके इस वजह से मानव तस्करी भी बढ़ेगी और बच्चे बाल श्रम के जाने की पूरी संभावनाएं है। इसलिए हमें निवारण के साथ अनेको व्यवधान भी करने होंगे। बाल संरक्षण आयोग की मेंबर श्रीमती जया सिंह ने भी पंचायत स्तर को मजबूत करने की बात कही ताकि प्रवासी रेजिस्टर के द्वारा बाल मजदूरी के निकास पर बच्चो की पूरी जानकारी रहेगी। इसके साथ ही उन्होंने बच्चो के परिजनों को जागरूक करने के लिए बात रखी, ताकि बालश्रम में जाने से पहले ही हम रोक सके। वेबिनार के माध्यम से हुए चर्चा में बाल आयोग के अध्यक्ष श्री विशेष जी ने कहा कि चाइल्डलाइन कार्यकर्ता को भी कोरोना वारियर माना जाए और उनके हेतु यदि चाइल्डलाइन या चेतना संस्था बीमा के लिए अनुरोध पत्र देती है तो आयोग उसका अनुमोदन सरकार समक्ष रखेगे।

सभा के अंत मे वी वी गिरी नोएडा से डॉ हेलन आर शेखर ने लोकडाउन की स्थिति में चेतना के द्वारा किये गए सभी कार्यो और ऐसी बैठक की प्रसंशा की और इस तरह के कार्य मॉड्यूल एव बैठक अन्य राज्यो के संस्थाओं को करने के लिए प्रेरित किया। ज़ूम द्वारा आयोजित की गई (वेबिनार) बैठक के अंत में कोरोना की स्थिति में बालश्रम पर बच्चो के द्वारा बनाई गई कुछ झलकियां धन्यवाद के साथ प्रस्तुत की गई।