जेवर एयरपोर्ट से दिल्ली-एनसीआर के उद्योग चढ़ेंगे परवान

jewar airport

जेवर के पास बनने वाला नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट वर्ष 2040-50 में 70 मिलियन पैसेंजर और 2.6 मिलियन टन कार्गो की क्षमता वाला हो जाएगा। इसके बनने से दिल्ली-एनसीआर के उद्योगों को नई दिशा मिलेगी। वहीं, एयरपोर्ट बनने से एक लाख से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार भी मिलेगा। अप्रैल 2017 में शुरू हुई एयरपोर्ट बनाने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। इसके लिए 745 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जा चुका है। ग्लोबल टेंडर के जरिए निर्माण कंपनी चुनने के लिए काम चल रहा है। देश-विदेश की 18 कंपनियों ने इसके निर्माण में रुचि दिखाई है।

नोएडा इंटरनैशनल एयरपोर्ट के नोडल प्रभारी शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि एयरपोर्ट को अगले 30 साल में पैसेंजरों की संख्या और कार्गो की जरूरत को ध्यान में रखकर बनाया जाएगा। अनुमान है कि एयरपोर्ट पर 2040-50 में मुसाफिरों की संख्या 70 मिलियन हो जाएगी। इसके साथ ही यह देश का सबसे बड़ा कार्गो इंटरनैशनल एयरपोर्ट भी होगा। एयरपोर्ट को 2.6 मिलियन टन कार्गो की क्षमता का बनाया जाएगा। इससे दिल्ली-एनसीआर के शहरों में व्यापार व उद्योगों को बेहद फायदा होगा। कार्गो से कच्चा और पक्का माल आसानी से आयात और निर्यात किया जा सकेगा। 9 सितंबर तक देश-विदेश की 18 कंपनियों ने टेंडर खरीदे हैं। बिड को लेकर मिली क्वेरी का जवाब देने की 30 सितंबर अंतिम तारीख है। इसके बाद टेक्निकल बिड 6 नवंबर को ओपन होगी। फायनैंशल बिड 29 नवंबर को खुलेगी। दिसंबर तक निर्माण कंपनी का चुनाव कर जनवरी 2020 में एयरपोर्ट निर्माण का काम शुरू करने की योजना है।

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